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AZIZ KALHOR TERRIFIED POET OF IRAN

AZIZ KALHOR TERRIFIED POET OF IRAN

عزيز كلهر بنیانگذار شعر وحشت ایران و نظريه پرداز نوين ادبيات و شعر معاصر

 

 

 محسن چاووشي

 

 

(یه شاخه نیلوفر بذار روی قبرم)

 

 از ترانه هاي جديد عزيز كلهر را خواند

 

سايت ترانه هاي فارسي

 

 

بدون تو سنگم.کنار تو ابرم

بیا تا گریه کنم.سر اومده صبرم

نه گریه مونده برام.نه خنده مونده برام

فقط یه کابوس کشنده مونده برام

کسی که هستیشو به وعده هات داده

یه بار بپرس چرا به این روز افتاده

همه ش تو این فکرم.الن تو فکر چیه

کجاست چیکار میکنه.الان کنار کیه

بدون تو سنگم.کنار تو ابرم

بیا تا گریه کنم سر اومده صبرم

اگه یه روز مردم.بیاو گریه کن و

یه شاخه نیلوفر بذار روی قبرم

یه حس گیج و سمج همیشه همدممه

میگن شکنجه بسه.میگم بازم کممه

نگات چرا چشمی به من نمیدوزه

چرا برای دلم.دلت نمی سوزه

تو فکرو ذکر منی ولی ازم دوری

دلت نخواسته منو.نگو که مجبوری

ترانه از عزيز كلهر

 

 

 İRAN AZİZ Kalhor DEHŞET ŞAİR

 

 

 

عزيز كلهر الشاعر المروعين في إيران

 

 

 

 

 

بزودی عزیز کلهر منتشر می کند

 

مجموعه شعر:شام آخر از خون تو خوردم خوابم برد

 

 

 

 عزيز كلهر

 

 

 بعنوان شاعر برگزيده  و کاندیدای جایزه بین المللی 

 

 

 فستيوال جهانی صلح

 

 

 

سيمرغ ادبي بنياد آرمانشهر

 

 

 

  افغانستان

 

 

 

 

 در دفاع از کودکان جنگ زده ی جهان

 

 بویژه کودکان مسلمان

 

 

عراق - افغانستان -فلسطین و لبنان -غزه

 

 

 شناخته شد

 

 

 aziz  Kalhor

 


  The doctrine of literary horror

 

 

Written by

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

 

(( زائو )) 

 

 

گره از گردنم گشودم
خون بچرخ آسياب افتاد چرخيد
باد به دامان دريا لرزيد
وجان به جوهر من خنديدم
متولد شدم

اما . . .
زائوي من كه چين در چهره
و چروك در چاره داشت
مرد
مرگ سر آغاز من بود

 

((سرطان))


من به تو
و
تو به من
آلوده اي
آلوده
به شكل سرطان كه در هم سرايت كرده ايم
و در پس
هسته اي شكاف خورده در نقطه اي كور
بهم رسيده ايم
خورشيد
بر جنازه هاي عفوني مان سقوط خواهد كرد


 

((سالومه))


نيمه شب سيزده هم ماه مرداب است
و اشياء
در خلسه اي خونين
فرو مردابيده اند
باد
از مغز يخ زده زمين
عبور ميكند
آنجا كه ذرات نور
چون سوزن
در سر و سينه ام فرو مي روند
پيرزني گوژ پشت
با ردائي
كه نقش چندين هزار
رتيل
بر خود دارد
مدام زو مي كشد
هلا . . . هذيانا
او كسي جز سالومه نيست
ساحره اي كه به مسخ من
مي كوشد
و دهانش جهنمي ست
كه بوي مردار پتياره مي دهد
همه چيز
زير فرمان سالومه است
حتي ماه
كه نيم تنه ي خود را
در آغوش صاعقه انداخته است
و يا . . .
عنكبوتي سياه كه با بوي لقاح ديوانه وار
زوجش را
در ترك ديوارها
در دم مي كشد
هوا
هوا . . .
هواي آلوده ايست
ياران
وگرنه من از تناسخ به تنگ آمده ام
و از سالومه
ماده نر مخنثي
كه شبيه خرچنگ راه مي رود
و لانه دركنار مرداب دارد
 

(( مسموم))

 
ماه را دو نيم كن
و در دو دست شكسته ات
بگير
و
بر جنازه خورشيد برقص
تا زنجيره اي از
ستارگان خاموش
به گرد گردنه ي استخواني ات بپوسند
و مدام
بر پوستي كه انداخته اي
تف كن
كه هواي تازه ترا مسموم مي كند
جني باش
با دو چشم تراخم كرده
در سردابه اي باستاني
در كالبد كاشي ها نفوذ كن
تا پژواك مويه وار تو
مو از تن كفتار بريزاند
هواي تازه ترا مسموم مي كند
هيولا شو .... هيولا
با صورتي مسطح
و دندانه هايي دلتا شكل
كه وقتي بخندد
اشك بر قرنيه هامان
بخشكد
ان گاه از پس هر دري چهره ي چهار ضلعي را خواهي ديد
كه پيشاني اش را با خط ميخي نوشته اند
هواي تازه تو را مسموم مي كند
دست در حدقه هاي موميايي چشمانت كن
وبه جاي ان
دو خفاش خوابيده
چشم گرگ بگذار وببين
كه جهان همه تيفوسي اند
وپشت شيشه عينك هاي ماهواري شان
مردمك ها
دو هسته ي اتشينند
كه بر ظلمت سگ سايه هاي هار
تمركز كرده اند
و براي قطعه قطعه كردن تو
ساطور تيز مي كنند
مسموم هواي تازه تو را می كند 

 

درخت مقدس


پاییز که پلک های سوخته اش را بردارد
زمین می خشکد
زمان می ایستد
اسمان رنگ می بازد
تا ارواح دختران زنده به گور
دوباره پای ان درخت مقدس
گرداگرد هم ایند
وشب را
در شیشه ایی
گلوی کشدار هم ان قدر
بریزید
که صبح چون بومیان افریقایی
بر خلیج های خون گرفته ی زمین
بر قصند

پاییز که پلک های سوخته اش را بردارد
تابوت های چوبین
بر شانه های اسکلت های این گورستان
به حرکت در می ایند
ودر انتهای صفوف استخوانی شان
کودکان بریده سر
بغض های گره خورده در گلو را
از عروق پاره پاره فواره می کشند

پاییز که پلک های سوخته اش را بردارد
نسلی از پا برهنه گان
کارتون خوابها
وگر سنه گان
به تولید علامت سوال می پردازند
وزیر تیر چراغ برق ها
بی شمار کسانی خوابید ه اند
که در حافظه کورشان
صدای پای هزارغریبه ثبت کرده اند

 

صدا


صدای ملتهب مردیست
مرد
که انگشت اشاره اش
شاخه ی شکسته ی بیدیست در باد
ونیمه پنهانش ویرانه ایست
که جغد ها در ان لانه کرد ه اند
مردی
مرد
که فانوس هزار ساله کور
این کوچه ها را
در دست
و زخم تیغ نا ساز گار روزگار را بر رگ
پا پیاده
در مسیر مه الودی نهاده
که ساطور های برنده
و
دهان های مکنده
مدام
برای بریدن وبلعیدنش
سابه در سایه ی هم
شورید ه اند
صدا
صدای ملتهب مردیست
مرد
که تکه تکه های تنش را
در دهان دریده ی گورستان
می ریزد
تا اشباح کلاغ های خبر چین
از حفره های متعفن
هزار سردابه کهنه
طوری قار بکشند
که انگار قیامت است 

 

قاره ی خون


زمین میچرخد
مردان سربی با سرعتی سر سام اور
ذوب می شوند
جنگجویان زمین
با اسلحه هایی لیزری
سر بر دیواره هاب هزاره ی
سوم سکوت می کوبند
ودخترکان قاره های فقیر
دخیل های خود رابه بمب های خوشه ای
گره می زنند
عفریته عریان بر سر در وازه های جهنم
رجز می خواند
وخون در رگ زندگان
لخنه می بندد
مخربی

مخربی تلخ
بر بام خرابه هایی مخوف
با دست های شیمیایی
و
گام هایی اتمی که زمان را می بلعد
بر روی شانه های پلاسیده ام
ابلیسی
حلول کرده که قطره
قطره
قطره قطره
کابوسم را در می نوردد
وبر فلاتی از افیون
در خلا یک انسان
ادم
شبه ادم
میچرخم
و
می گریم
واشباح فسفرین فرشتگان را پودر میکنم
اینک
من مانده ام و تندیس رقاصه ای
که به زوزه ی سیاه باد ها
تن به رعشه وتشنج داده ام

 

برمدار هيچ

 

 زمین از منظومه ی جنگ ها بر می گشت
با اقماری ازگلوله های توپ ها
تانک ها
وسر کودکانی
که بر مدار مهیج
افتاب
می چرخیدند
ومی سوختند

هنوز
خون های گرم
طوفان های سرخی در سواحل خلیج خوک ها
بر پا کرده
بود
که.....
هوابه قیمت طلا
در ریه های منبسط درختان
می ریختند
و
زنانی که جنین های خود را با بند ناف
به دار کرده بودند
این مرثیه ی ادمیزاد است

  

 

 Доктрина литературного

 

 

ужаса

 

 

Автор

 

 

 


 

 

 

 

 

ترجمه روسی اشعار عزیز کلهر

 

 

 

 

((Роженицы))

 

 

Я проснулся от моего узла
Кровь-ролл мельница была превращена
Ветер на море колени дрожали
Я смеялся до чернил Vjan
Я родился

Но. . .
Китай в лицо моей роженицы
И морщины на курорте
Человек
Я начал умирать

 

((Рак))


Я люблю
И
Я я
Инфицированный
Загрязненный
Форма рака, которые распространились
И в
Ядерная раскол в слепое пятно
Я был
Солнце
Инфекционные тело упадет на нашу


 


((Саломея))


Лагуна тринадцать месяцев полуночи
И объекты
В кровавый транс
Рухнули Mrdabydh
Ветер
Из замороженного мозга
Проходит
Легких частиц
Иглы
Я вхожу в голову и грудь
Горб за старухой
Мантии
Роль из нескольких тысяч
Rtyl
На его
Чжу требует постоянного
Эй. . . Hzyana
Он кого-то другого, чем Саломе
Я ведьма, которая искажала
Попытки
И рот, это ад
Есть ли запах падали землеройка
Все
Саломе имеет следующие
Даже луна
Торс
Молния охватила
Или. . .
Черный паук с сумасшедшим оплодотворения запах
Zvjsh
Трещины стен
Возьмите в хвосте
Воздух
Воздуха. . .
Стоп загрязняющих воздух
Сподвижники
В противном случае, я приехал, чтобы пропустить реинкарнации
И Саломе
Мужской Mkhnsy
Он ходит, как краб
И гнезда рядом с лагуной
 

((Poison))

 
Добавьте половину месяца
И сломанной в ваших руках
Принимать
И
Похороны на ВС Brqs
Цепь
Звезда с
Кости вокруг вашей шеи Bpvsnd
И постоянно
Нанесите на кожу
Коса меня
Свежий воздух отравлен вы
Дженни
Два глаза трахомы
В древнем склепе
Влияние мне в тело плитки
Я люблю эхо Mvyh
Волосы от гиены людей Bryzand
Свежий воздух отравлен вы
Получить монстра .... Монстр
С плоским
А дельта-формы зубов
Когда Bkhndd
Роговицы слезы на наших
Bkhshkd
Затем дверь четырехугольник лица про зрение
Его лоб клинописям, которые
Свежий воздух отравлен вы
Разъем мумию в моих глазах
И вставки
Два спальных летучих мышей
Wolf Eyes Давайте Vbbyn
Мире все тифа
Vpsht стеклянные очки на своих ежемесячных
Ученики
Два основных Atshynnd
Тьмы, тени бешеная собака
Была сосредоточена
А для тебя на части
Существуют резкие тесак
Я буду яд свежий воздух

 

Священное дерево


Его веки сожгли падения выбрать
Имеет ли высушить землю
Время стоит
Бледное небо
Живите до могилы девушки призрак
Подножия священного дерева
Я прихожу вокруг
Vshb
В стекле
Упругой горло так
Складка
Я родной африканской
Залив кровью на земле
Qsnd

Его веки сожгли падения выбрать
Гробы Choobin
Кладбище на плечах скелет
Давай двигаться дальше
И ряды их кости
Дети вырезать головы
Связали, несмотря на горле
Судов фонтаны дыма разрывается

Его веки сожгли падения выбрать
Генерация босиком Gun
Ваши мечты
Gun Vgr год
Для получения знака вопроса являются
Министр полюс
Бесчисленное множество людей, которые спят
В память о Сайрус
Hzarghrybh шаги были зарегистрированы

 

Звук


Воспаленные Mrdyst голос
Человек
Указательный палец
Bydyst сломанных веток на ветру
Руины является полу Pnhansh
Гнезде совы будут в ней
Человек
Человек
Тысяча-летний слепой маяк
Улицы
В
И не Гар бритвы производителя рана затянулась судно
Ноги от
Мутность в исходном
Победителем вертолет
И
Всасывания рот
Постоянно
Для резки Vblydnsh
Sabh в тени
Shvryd есть
Звук
Воспаленные Mrdyst голос
Человек
Фрагментации Напряженность
Кладбище в рот разорвал
Перерыв
Призраки ворон Китая
Вонючий отверстия
Подвал старого
Так убить Кар
Это Воскресение

 

Кровь континента


Земля вращается
Стороны Сэма головы мужские привести со скоростью
Таять
Земли воинов
С лазерным оружием
Голова на стену хаб тысячелетия
Третий молча Kvbnd
Vdkhtrkan континента бедных
Необходимость привлечения их кассетных бомб
Узлы делать
Голая ведьма на словах ад
Поет похвалы
Кровеносные сосуды в гостиной
Lkhnh закрывается
Опустошительный

Горькие разрушительного
Руины пресловутый крыши
С химической
И
Атомная шаги, которые много времени ласточки
Высушенные на мои плечи
Дьявол
Реинкарнация, которая падает
Капли
Гуттаперчевый мяч для гольфа
Kabvsm мая зачисток
Вебер плато опиатов
Человек в вакууме
Отек
Отек-подобных
Mychrkhm
И
Плакать
Я Fsfryn Vashbah ангелы порошок
Сейчас
Я был статуей балерины
Черного ветра вой
Тремор есть тонны Vtshnj

 

Нет Brmdar

 

 Война на полу Солнечной системы
Шары со спутниковым Azglvlh
Цистерны
VSR детей
Захватывающая цепь
Солнце
А оказалось
Vmy сожгли

До сих пор
Теплая кровь
Красный шторм у берегов заливе Свиней
Установил
Был
.....
Золото Hvabh
Деревья в легких расширяется
Разливают
И
Женщины и их плодов с пуповиной
Там было
Реквием Admyzad

 

ترجمه تركي استانبولي اشعار عزيز كلهر 

 

((Azalış))

 

 

Boyun Düğümler açıldı
Rulo değirmen kan oldu döndü
Sallayarak deniz kucağına Rüzgar
Ben mürekkep Vjan güldü
Doğduğum

Ama. . .
Ben rakam Çin'de bu azalma
Ve kırışıklıkları çare bulundu
Man
Başım ölmeye başlamıştı

 

((Kanser))


Ben
Ve
Ben
Infected
Kirlenmiş
Yayılmış kanser Formu
Ve in
Kör noktada Nükleer bölünmüş
Oldum
Güneş
Cenaze bizim bulaşıcı üzerine düşecek


 


((Salome))


Gece yarısı bataklık on üç aydır
Ve nesneler
Kanlı bir transa
Mrdabydh çöktü
Rüzgâr
Dondurulmuş beyin
Passes
Işık parçacıkları
İğne
Ben baş ve göğsünden aşağı gitmek
Yaşlı kadının arkasında Hump
Manto
Birkaç bin rolü
Rtyl
Onun üzerinde
Zhu sürekli alır
Hala. . . Hzyana
O Salome sadece
Bir cadı Metamorfoz I
Girişimleri
Ve ağzını cehennem
Mu leş faresi kokusu
Her şey
Salome aşağıdaki komutu vardır
Hatta ay.
Bedeninizin yarısı
Yıldırım kucakladı
Veya. . .
Gübreleme ile Siyah örümcek Madly kokusunu
Zvjsh
Çatlak duvarlar
Kuyruk Alır
Hava
Hava. . .
Kirli hava tutuklama
Arkadaşlık
Aksi takdirde, ben reenkarnasyon özledim geldim
Ve Salome
Kadın Erkek Mkhnsy
Bir yengeç gibi Walks
Bir lagünün yanında ve yuva
 

((Zehirli))

 
Ay split
Ve senin elinde kırık
Almak
Ve
Ceset üzerinde güneş dansı
Bir zincir
Yıldız kapalı
Senin boyun kemiği Bpvsnd yuvarlak
Ve sürekli
Cilt giy
Tükürmek
Temiz hava size zehir edecek
Jenny olun
İki göz trahom vardı
Eski bir crypt içinde
Vücut Kurutma Fayans
Echo gibi inilti benim
Sırtlan Bryzand saç Ton
Temiz hava size zehirlenmiş olur
Canavar alın .... Canavar
Düz
Ve delta-şekilli dişleri
Zaman Laugh
Bizim üzerinde Kornea gözyaşı
Bkhshkd
Sonra her kapının dörtgen yüzünü görürsünüz
Var çivi yazılı Alnı
Temiz hava size zehirlenmiş olur
Soket ve görünümlü Mummy gözleri
Ve bunun yerine
İki uyku yarasalar
Kurt gözleri bakıyor olsun
Dünyanın bütün tifüs var
Arka cam gözlük, onların aylık
Öğrenciler
Iki temel Atshynnd
Koyu gölgeler kuduz köpek
Odaklanmıştır
Ve parça için
Keskin balta mısınız
Temiz hava size zehirleyebilir

 

Kutsal Ağaç


Sonbahar alın, göz kapaklarının yandı
Yere kurur mu
Zaman duruyor
Soluk gökyüzü
Diri diri toprağa gömülen hayalet kız
Kutsal ağacın Yine ayak
I come around
Gece
Cam
Elastik boğaz bu nedenle
Katlayın
Sabah, çünkü Afrika yerlileri
Bay yere kan oldu
Qsnd

Sonbahar alın, göz kapaklarının yandı
Choobin tabutlar
Bu mezarlık omuzlarında iskeletler
Hareket gel
Ve onların kemik saflarına
Çocuklar kesip
Boğazda şişkinlik Tied
Öldürmek yırtılmış damarların Çeşmesi

Sonbahar alın, göz kapaklarının yandı
Yalınayak Gun Üretimi
Çizgi Düşler
Vgr yıl sakinleri
Ödemek oluşturmak için soru işareti
Kutup Bakanı
Uyku sayısız insan
Cyrus anısına
Hzarghrybh ayak kaydedildi

 

Ses


Iltihaplı ses Mrdyst
Man
Bu onun parmağı
Rüzgar Bydyst kırık dal
Bir kalıntıları yarım gizlemek midir
Içinde baykuş irade yuva var
Man
Man
Bin yıllık deniz feneri kör
Sokakları
Içinde
Razor inşaat süresi ve Gar gemide aşağı yara
Ayaklar kapalı
Bulanıklık yılında kurulan
Kıyıcı kazanan
Ve
Emiş ağzının
Sürekli
Vblydnsh kesmek için
Gölgesinde Sabh
Shvryd mı
Ses
Iltihaplı ses Mrdyst
Man
Gerginlik parçalanması
Yırtılmış ağzında mezarlık
Vurmuş
Çin'in için Ghosts kargalar
Pis kokulu delikler
Eski Crypt
Böylece Qar Kill
Bu kıyamet bir

 

Kan kıta


Dünya döndükçe
Sam Orr üzerinden Erkekler hızı kurşun
Eritmek
Zemin savaşçıları
Lazer silahları ile
Hub duvarında Millennium kafa
Üçüncü sessizlik Kvbnd
Vdkhtrkan yoksul kıtası
Misket bombaları için onların katılımı
Düğüm dönüşler
Çıplak bir deyişle cehennem cadı
Şükretmeye
Canlı kan damarlarının
Lkhnh kapatır
Yıkıcı

Yıkıcı Bitter
Çatıda korkunç kalıntıları
Kimyasal ile
Ve
Zaman yiyip bitiren Atom adımları
Omuzlarımda kurudu
Yılan
Damla Reenkarnasyon,
Damlalar
Gutty
Mayıs ayında Kabvsm süpürür
Opiatların Weber plato
Bir vakum
Ödem
Ödem-gibi
Çevirmek
Ve
Ağlamak
Ben Fsfryn Vashbah melek tozu
Şimdi
Bir balerin heykeli oldum
Rüzgar siyah uluyan edilir
Titreme ton Vtshnj var

 

Brmdar yok

 

 Savaş Güneş Sistemi'nin kattaydı
Uydu verileri ile Azglvlh topu
Tanklar
VSR çocuk
Heyecan verici devresi
Güneş
Dışıdır
VMY yandı

Yine de
Sıcak kan
Domuzlar Körfezi kıyılarında Kırmızı fırtına
Kurdu
Oldu
.....
Altın Hvabh
Ağaçlar akciğerleri genişletir
Akıtıldığı
Ve
Kendi kordon olan kadınlar
Orada vardı
Requiem Dmyzad edilir

نوشته شده در Fri 14 Nov 2008ساعت 0:28 AM توسط کانون حرفـــــه ای شاعران نوپرداز ایران | |

 

 

He's part of the doctrine of poetry written by horror
Small part of the doctrine of literary poetry by the poet, suffering the horrors of World's Kalhor
terrifiedED

The doctrine of literary horror

 


Written by:

He's the founder of the poem's horror

 

I'm not overbearing or rebellious roots in the range

The fear is imaginary

Diagonal and dramatic death, or poisoned, and turns on the circuit

Switching around the graves and set up under the skin in the range of malignant pain Vrnj
No gains

I am the reincarnation of the dark and the what the hell Rvzyst

His death at the mouth of the valley of the damned, and I heard Whirlpool

But given that I have tons of molten doom

Half the night I happened Tkydh except red blood will not

This is where the soul lives on after all this Srabhay Varh a smelly pubs have experienced

Illegibility of the text and lines Azsr wrote the unconscious complex have stolen the future

Hvlnaktryn moments and protect it like crazy in limbo and I have written decay

 

 

 

 

 

Now every night
The howl of terror on the ground dead in the resort's

I understand that only those who pay for their own survival in the lagoon has

Now stripped of the desire to live and offend in the beginning days of Jami

Incontinence Glvgahm have dumped tons of words to give nausea

The old soul of every human being to lead astray, and the struggle for survival

Every time the force and pressure to sharpen their claws

The carcass of an inflamed and torn shingles from the ground to draw the force which opens from the top of Bndm

And the position of the vortex because of my rotten bones collection

Why in the world as the grave, like family

The opportunity to swing the ominous sound of the second data stream to forward to

Shvdta off the ground at an angle to the size of eyes burning scarecrow on a farm Choobin

Just see it once and Nchrkhd

 

 

 

قسمتی اندک از اولین دکترین ادبی شعر وحشت توسط شاعر رنج دیده ی ایران زمین عزیز کلهر


مقدمه ی دکترین ادبی وحشت




به قلم:

عزیز کلهر بنیانگذار شعر وحشت ایران


عصیانگری چون من که ریشه در گستره ی

موهوم وحشت دارد

و بر مدار مورب و مسموم ویا مهیج مرگ می چرخد

جز سایه گزینی در حوالی گورها و پوست اندازی در دامنه ی بدخیم درد ها ورنج ها
عایدی ندارد

من که حلول کرده ام در میان هر ان چه جهنم و تیره روزیست

فرمان مرگ خود را بار ها از دهانه ی دوزخی هزار دره و گرداب شنیده ام

اما تن در عذاب مذاب گریه هایی سپرده ام

که شبانه نیم رخ تکیده ام را جز به خون سرخی نمی بخشد

این جاست که آ واره گی روح را در پس این همه سرابهای متعفن بارها تجربه کرده ام

و خطوط نا خوانایی ازسر نوشت را ناخوداگاه از متن پیچیده ی آینده ربوده ام

و هولناکترین لحظات ان را دیوانه وار در برزخ بی پناهی و پوسیدگی سروده ام











اینک هر نیمه شب
در میعادگاه مردگان زمین زوزه های وحشت بر انگیز

مرا کسانی درک می کنند که تنها مزد انها ماندگاری در این مرداب خود ساخته است

اینک برهنه از میل به زندگی و دلخور از جامی که در ازل روز

بی اختیار در گلوگاهم ریخته اند تن به تهوع کلماتی می دهم

که روح فرسوده ی هر انسانی را به بیراهه می کشاند و در تنازع برای بقا

هر بار به جبر و فشار چنگال تیز کرده ی خود را

به لاشه ی ملتهب و زونا زده ی زمین می کشم واز ان نیرو که از بالا بند بندم را باز می کند

و از ان سمت که چون گردبادی مجموعه ی استخوانی پوسیده ام

را در گوری به اندازه ی دنیا می چر خاند می خواهم

فرصتی که به دقت صدای اونگ شومی که ثانیه ها را به جلو جریان می دهد

خاموش شودتا زمین در زاویه ای به اندازه ی چشم های مترسکی چوبین در مزرعه ای سوخته

فقط و فقط یک بار حقیقت را ببیند و دیگر نچرخد










دکترین بین المللی شعر وحشت

روزهای سختی برزمین گذشته است، روزهایی تاریک، تاریخ جهان همواره پرازصداهای دلخراشی ازجنگها، خونریزی وکشتار، برادرکشی ونسل براندازیهاست.

انسان به مثابه چرخی بوده که بی آنکه بخواهد باراین همه وقایع را ازبدو آفرینش تاکنون کشانیده است وصدای شکستن خود را بین این همه تنازع بارها شنیده است.

ازهمان روزنخست برادرکشی چاشنی تاریخ شد وجنگهای فزون خواهانه خرابه های بسیاربرجا گذاشت.

جاه طلبی انسان وحس سیری ناپذیری وی دست مایه کثیف کشتارشد تا غضب وتجاوز، تعدی وهتاکی ازنرون گرفته تا چنگیز، ازآتیلا تا هیتلر، بسترقصه های تاریخ شدند.

انسان سرگرم خونخواره گی شد، سرگرم هم نوع کشی وتاریخ را با خون وتباهی نوشت، ویرانه ها را ویرانتروآبادیها را ویران وسیاست شهرهای سوخته را به اجراء گذاشت وبردگی را گسترش بخشید وبسترمناسب تعالی برای رشد عقلایی انسان را به جهنم مبدل ساخت وجهل را دانش فزون طلبی معرفی کرد.

چوب وسنگ وماه را پرستید، حرمتی که برای گاوقائل شد برای انسان هم نوع خود منتفی دانست وانسان را زیرپای گاوسربرید.

جهالت همچنان سیر سنتی خود را طی کرد وبرمدارنادانی آنقدرکشت که بوی تعفن تاریخ بلند شد. گروهی سیرتحولات تاریخ را جبری می دانستند وگناه اعمال ننگین انسان را درمسیرتاریخ به گردن یک نوع جبرفلسفی می انداختند.

گروهی دیگرارادی تعبیرمی نمودند واحکام صادرمی کردند.

این دوگروه اومانیسم را درحوزه ارادی وجبری با پادرمیانی تاریخ به یک سمت می کشاندند. آن هم تبرئه کورکه قانون بقای کشتاررا تثبیت می کرد واین نیرنگ جهل فلسفی ست.

اینان هرگزتصمیم خود را درمورد انسان وحالات روانی با منشاء پوچی ودید هیچ گرایانه ی انسان به نقطه پایانی یعنی فنا عملی نکرده بودند وبررسی این نوع پیامدهای شوم وتاریک را هرگزبه حوزه نقد روانشناختانه نکشانیده بود واگرلحظه ایی نیزبه این مقوله ناخنکی زده اند متاسفانه حاشیه گرایی دراین موضوع محرزاست.

پرمسلم است که رفتارهای تاریک انسان ازعصرآفرینش تا چالش برانگیزنده دوران پرستش پوچی وبت یابی، بردگی وبرده داری ومرید ومراد گرایی را، عامل ظهورپیغمبران شد.

ادیان الهی با رسولانی متنوع نیزدرزندگی بشرپدید آمدند، بشرایمان آورد واخلاق ورفتارگرایی الهی، مذهبی را چراغ راه تاریکی دانست وآنها را تکریم نمود.

مدتی نگذشت، حس غریزی گرایش به لذتهای ممنوع، چنگالهای تیزانسان را دوباره فاش نمود یا عصیان کرد یا دربرابرادیان دیگرایستاد ویا خواست تا سیرصعودی خود را بازهم با صف آرایی دین بار ازنوع اعتقادی وایدئولوژیکی تکمیل سازد.

ازاین رو به جای نقد عالمانه ی هم نوع کشی ویا غیره نیزه ها را تیزکردند، شمشیرها را بیرون کشیدند وبازهم تراژدی کشت وکشتاربه راه افتاد.

جنگهای کوچک، نزاع های محلی درابعاد قصبه ویا روستایی، تصفیه حسابهای قومی،قبیله ای به تنازع های ایدئولوژیکی مبدل شد وجنگهای امپراطوری صلیبی به راه افتاد.

واین بارفلسفی تر، دهشت ناکتر، مرگ هم را مباح می دانستند وکلمه ذبح به سادگی صادر می شد. سایه ی وحشت وهراسناکی جهان را هدف قرارداد ورفتارهای تاریک متن مقدس ادیان را نشانه رفتند تا اینکه انسان پوتولیزم را مانع رشد وتعالی خود دانست وکسانیکه درچنبره چکیده های پوتولیسمی می چرخیدند را واپسگرا ومرتجع معرفی نمودند.


فلاسفه مدرنیته آمدند وجا پای پیامبران نهادند وهریک با ارائه و افریدن مکتب ها وایسم های مختلف صادره ازآبشخورهای غربی وشرقی، آفرینش نحله های روشنفکری را برعهده گرفتند وپایگاه های اجتماعی وسیاسی خاصی را بنا نهادند.

رنسانس درحال وقوع بود که بشرازلحاظ علمی سیرتاریخی کندگرا را کنارزد وسرسام آور به سرعت به تولید، کشف واختراع وابداعات حائزاهمیتی دست یافت.

کم کم مرزبندی های تکنولوژیک وژئوپلتیکی به قدرت رسیدند.

انسان کنارگذاشته درمیان دود وآهن با طرحی نوستالوژیک متولد شد، اعتقادات مذهبی رنگ باخته با اثربخشی زندگی مدرن درکنارمکاتب ایسمی باردیگرعقده های تاریخی کوروبه خواب رفته ی سردمداران سیاسی جهان را بدجوری جنباند . ایسم ها که تعدادشان ازادیان الهی فراتررفته بود باردیگربه علت تناقض های فراوان واشکال متفاوت درتعریف وتوجیه انسان وحس برتری جویانه ای که تئوریس های خرده پا ازآنها کرده بودند به جان هم افتادند وبه تولید وتکثیرسلاحهای کشتارجمعی انسان روی آورد.

حمله های اقتصادی ویرانگر، شورش های سیاسی ، اجتماعی - جنگ های الکترونیکی نبردهای سهمگین سرد جهالت عالمانه ی انسان را برملا کرد.

میلیونها انسان بی گناه مابین جنگهای جهانی اول ودوم وخرده جنگها وتسویه حسابهای نژادی، ایسمی زیرباران بمب های خوشه ایی، اتمی وشیمیایی خاکسترشدند.

اینک سایه جنگها برسردنیا کوتاه نیست، درچهارگوشه جهان پیامدهای منفورتنازع برپاست، جنگ فقروایدزوبیماریهای مهلک روانی، اعتیاد، وقوع حوادث عذاب گونه، آماربی خانمانها، فحشا وکودکان کارگر، زنان بی سرپرست، جرم وجنایت، خود کشی واحیای دوباره ودیگرگونه ای ازنژاد پرستی، اشغال گری وانحرافات اخلاقی، بشریت را رو به پرتگاه هدایت نموده است.

حقیقت این است انسان برسرشاخه ای نشسته است وشاخه زیرپای خود را دارد بی هیچ تاملی می برد.

اینجاست که وحشت آخرین احساس انسان به هستی براندازشده ایی است که انتظارش را می کشد.

اینجاست که انسان واحساس آن به آینده تاریکتراز شبی ست که ماه پشت ابرمانده است اما نشانه های آخرالزمانی یکی پس ازدیگری درحال وقوع است .

خروج سفیانی ودجال، آتشی که ازانتهای عدن بلند می شود وجهانی را به صحاری اورشلیم ... می کشاند، زلزله ها ی زیاد درزمین، سیل وزنا با محارم، سختی معاش، امراض لاعلاج درزمین، ظهورآفات های اخلاقی، فقر، فساد، تبعیض مسیری را ترسیم نموده ازجهنمی خود ساخته که گریزازهوای خاکستری آن مستلزم پانهادن روی تمامی جنازه های تاریخ است.

دراین یخبندان وآشفتگی، گیج روی وکج مداریها مکاتب هنری وژانرها عمیق ترین تاثیرات را پذیرفته اند. ژانر وحشت درشعرمعاصرپرده ازپنهان ترین لایه های نامتعارف از تصویر حس وفهم گرایی ها برمی دارد و به توصیف وتفهیم هرمنوتیک درمحتوا واوضاع موجود را بدون کم وکاست درفیلترهای بینشی خود عبورداده اند وبا ابزارهای هنری ومکتبی که دراختیاردارند به تشزیع وکالبد شکافی موضوعات می پردازند. ریختن این پرسه که حول محوررفتارتاریک انسان درادوار مختلف تاریخ دارد ونیل آن به سمت هیچگرایی وپوچ پنداری است جز ازعهده اشکال متعارف این مکاتب فوق برمی آید دیگرراه چاره ایی متصورنیستم.





وحشت تراژدی نیست ،جنبشی برای تحقق بخشیدن و رسیدن به پست مدرنیسم نیست،پلورالیسم و کثرت گرایی در آن منوط به درک وقایع در حال جریان است ، اما شدت آن در حوادث آخرالزمانی با طیفی از اضطراب و کنش های غیر طبیعی همراه است .


پایه مستدل این امر محکم است که روزگاری فراخواهد رسید که کودکانمان را با لباس هاس ضد شیمیایی بخوابانیم ویا مانند وال ها اقدام به خودکشی دسته جمعی بزنیم .



فکر می کنم نظام هستی که بر اساس حرکت دوار دایره هاست دچار اختلال در محاسبه ها می شود و روند هندسی جهان تغییر می کند ، ذرات منحنی کلونی بزرگی از بی نظمی و آنارشی گری را تشکیل می دهند و عصر برخورد ،سقوط ، و ازهم گسیختگی و رهایی از مدارهای معین ،آغاز می شود ، هیچ تئوری پیشگیرانه های نمی تواند روند جریانات و وقایع آخرالزمانی را متوفق کند .

وحشت یک تفکر آخرالزمانی است ،که در پرسه ی اجتماعات بشری رخ می دهد، و دیدگاه های فلسفی وابسته به آن بسیارند اما متفاوت با آنچه که در هالیود یا هالووین به خاطر ایجاد فضای رعب و هراس بکار رفته است ، متغیر ودر تضاد با نحله های منحرف تعریف شده از فضای اضطراری و زنگهای خطری که در فیلم های عصر جدید برای مرعوب کردن مخاطب ترسیم شده اند .

ژانر وحشت در شعری که پایه ریزی کرده ام ، سعی در ایجاد هیجان نیست ، روی دیگری از سکه های ضرب شده در این قالب و فضا هم نیز نیست ، واقعیت جاری و سرایت کننده ای هست که غیبت آن قابل وقوع و شاخه هایی از آن به بار نشسته است و اصل آن مناقشه ی بشر برای فزون خواهی و زیاده طلبی وبا دیکته کردن اعتقاد خود برصفوف متقابل است ،که گاهی در جریان حرکت زمان یعنی تاریخ ، تنازع این دو ، به رخوت رخ داده ، اما اینها همه جرقه هایی کوجکند در برابر آن جریان در حال وقوعی که مسیر تاریخی خود را باید تکمیل و به پایان برساند وبه مرحله رشد خود برسد و کلید بخورد ، آنگاه تحقق می یابد و محقق شدن آن بستگی به رفتارهای تاریک انسان آخر زمانی دارد .

ظهور اریستوکراسیسم (سرمایه داری) و قطب بندی های ناعادلانه بین انسان ها و جوامع جهان پیرامون و حوزه ی قدرت و ثروت بزرگترین چالش و عامل وحشت در دنیاست ، فرزندان ناخلف این نگره ی شوم بی درو پیکر یعنی دو دیدگاه مخرب و دو جریان حلیه باز خون آشام و لیبرالیسم و نئوامپریالیسم همان فرمانده ی بی رحم فلسفی پوچی است که نقطه ی ظهور میلستاریسم (لشگرکشی) به قطب های ضعیف و در حال نابودی جهان برای چپاول ثروت آنها که پایه بی بدیل قدرتهای سیالسیون لیبرال و امپریالیسم جهانی است .

امروزه وحشت گالری خود را رو به جوامع فقیر و مرگ زده باز کرده است .

پرمسلم است که کادوهای سردمداران غربی جز بمب های مخرب نیست .

ودرمیان این همه بیغوله و ویرانی که به بهانه ی دموکراسی و ثروت درجهان به راه انداخته اند، سعادت و خوشبختی مرگ است .

هیچ کس فکر نمی کرد انیشتین دست به معامله ای کثیف بزند و حاصل تجربه گرایی خود در مورد ذرات ریز هستی (اتم ) را دو دستی به جانی ها بسپارد که بهای آن از بین بردن مردم هیروشیما و ناکازاکی و ... غیره باشد .

جهان بی فاشیسم و بی نازیسم بی ارتش های سرخ و زرد و قرمز برای اینها ضایعه جبران ناپذیری است .

حتی صدای مسیحایی موتسارت یا باخ ، بتهون نمی تواند جلوی جنایات آنها را بگیرد و قالب در پس این همه زیبایی عوض کنند .


عصر وحشت

عصر خواب های طلایی نیست ، عصر شکوه یک ملکه در کندو نیست ، عصراندام واقعیت هایی است که به حقیقت نزدیکترند .

و مترقی ترین فلسفه وجودی آن کشتار است و اعلام موجودیت در آن براساس خرافه هایی به نام دموکراسی ، تقسیم ثروت ، فقر زدایی و ... تئوریهای ظاهر نمایی که از آنسوی آتلانتیس به صورت موجهایی مخوف از برج کج پیزا می گذرند و تا سرزمین آفتاب می خزند .

گناه کشته شدگان هیروشیما و ناکازاکی برگردن کیست ؟ معصومیت مرگ دسته جمعی روستای دیریاسین و کپرقاسم و یا جوخه های مرگ در بوسنی و فلسطین بر گردن کیست ؟

آفریننده ی کشتارهای دارفور و ترورهای کور مثل کشتن انسان هایی بزرگ (پاتریس لومومبا) و زندانی نمودن نلسون ماندلا به مدت 27 سال نتیجه ی کدام نگره است .

نژاد پرستی صهیونیستی کابویی ، در رأس اقدامات وحشیانه و برنامه ریز تمام جنایات عصرحاضر در حوزه ی کشورهای مختلف است .

صهیونیست ها که با رویه ی قتل وعام و صدور نقشه های جنگ های خونین ، مغز متفکر نئوامپریالیست جهانی می باشند .

عملاً ثروتهای عظیم کارتلهای جهانی در غرب را هدف قرار داده و منافع نامشروع خود را با ایجاد وحشت از دیگران بالأخص قدرت های غربی و کشورهای تحت اشغال اخاذی می کنند و با مظلومیت نمایی در مورد قضیه ی مضحک و بی ریشه ی تاریخی هولوکاست خون دیگران را به سادگی بالا می کشند .

مگر غیر از این است که یک پای قضیه 11 سپتامبر رژیم صهیونیستی است که عامل تنازع اخیر در خاورمیانه است .

بررسی عوامل وحشت و رویارویی جبهه های حق در برابر باطل به آخرالزمان ختم می شود .

فلسفه ظهور ناجی و تبعیت آحاد زجر کشیده از این همه رنج توأمان با انواع فشار حتمی است .

اما عصر وحشت در راه است و اجرای آن منوط به اجرای انفجار در سرزمین های فقیر است . آفریقا محصول و مستعمره ی بی چون و چرای ، خون آشامانی هست که علاوه بر دیدگاه های نژاد پرستی مورد راهزنی سیاسی غربیها قرار گرفته است .

و آسیا نیز از نقشه های شوم استعماری نو و غارت منابع و جنگ نفت به ستوه آمده است ، این شک ها زاویه ی تزلزل را بالاتر برده اند .

در جهان میلیون ها زن بی گناه قربانی و بازیچه فرضیه پردازانی همچوم فروید می شوند .

که در دامنه ی تسلسلی فلسفی چنان به ابطال رسیده اند که قادر به تعریف شایسته ای از انسان و موجودیت آن نیستند / داروینیسم را دست مایه ی تحقیر بشر قرار می دهند تا او را به امیال حیوانی خود نزدیک تر کنند ، آیا این آغاز انفجار نیست ؟

در این خلأ فلسفی ، فیلسوف ها چه می کنند و یا فلاسفه هنوز در پی کشف رابطه ی علمی و معمولی خلق تخم مرغ و مرغ هستند ؟

واقعیت اینست : که اتودینامیسم انسانها بهم خورده است
و مخ های پریش فلاسفه مدرن کار دست بشر داده اند .




نوشته شده در Wed 5 Nov 2008ساعت 11:27 PM توسط کانون حرفـــــه ای شاعران نوپرداز ایران |

 
 

فصلنامه ادبی درگاه بزودی با سردبیر عبد الرضا شهبازی شاعر شهیر لرستانی

 

راهی بازار مطبوعات ادبی می شود 

 

بزودی  شعر های تازه ای از عزیز کلهر به روز می شود

  

انجمن ادبی خرم آباد

 

 بزودی نشستی را برای بررسی اشعار عزیز کلهر در سه دهه اخیر شعر معاصر ایران

 

برگزار خواهد کرد

  پرفسور میر جلال الدین کزازی

 

 از اشعار عزیز کلهر در دانشگاه آزاد اسلامی  اندیمشک

 

 در میان اساتید دانشگاههای خوزستان تقدیر ویژه بعمل آورد

 

 

ترجمه هندی  اشعار عزیز کلهر



 

 

गर्दन के नोड्स खोला
रोल मिल बदल गया रक्त था
समुद्र मिलाते गोद करने के लिए हवा
मैं स्याही  को हँसा
मैं पैदा हुआ था

लेकिन. . .
मुझे लगता है कि चीन में कमी
और झुर्रियों रिसोर्ट में पाया
आदमी
मेरे सिर करने के लिए मरने के लिए शुरू किया गया था

 

((कैंसर))


मैं
और
मैं
संक्रमित
दूषित
कैंसर के रूप में फैला है
और में
अंधा स्थान में परमाणु विभाजन
मैं कर रहा हूँ
सूरज
अंतिम संस्कार हमारे संक्रामक पर गिर जाएगा


 


((Salome))


यह आधी रात दलदल के तेरह महीने
वस्तुओं और
ट्रांस में एक खूनी
 किया है ढह
हवा
जमे हुए मस्तिष्क से
गुजरता है
प्रकाश कणों
सुई
मैं सिर और छाती में नीचे जाना
बूढ़ी औरत के पीछे कूबड़
पोशिश
कई हजार की भूमिका

अपने पर
झू लगातार लेता है

वह न केवल
एक डायन की कायापलट मुझे लगता है कि
प्रयास
और उसके मुंह नरक है
क्या सड़ा कर्कशा की गंध
सब कुछ
 निम्न कमांड
यहां तक ​​कि महीने.
आपके शरीर की है कि आधे
बिजली को गले लगा लिया गया है
या. . .
निषेचन के साथ काले मकड़ी पागलों की तरह गंध

दरार दीवारों
पूंछ में ले जाता है
हवा
हवा. . .
प्रदूषित हवा की गिरफ्तारी
फ़ेलोशिप
अन्यथा, मैं पुनर्जन्म याद आया हूँ
और
स्त्री पुरुष
एक केकड़े की तरह चलता है
और एक लैगून के साथ घोंसले
 

((जहर))

 
चंद्रमा विभाजित
और अपने हाथों में टूटा
लेना
और
लाश पर सूरज नृत्य
की एक श्रृंखला
स्टार बंद
अपने गर्दन अस्थि  के दौर
और लगातार
की त्वचा पर रखो
थूक
ताजा हवा आप जहर
जेनी होना
दो आँखें ट्रेकोमा था
एक प्राचीन तहखाना में
शरीर ड्रायर में टाइलें
की तरह कराह रही करने के लिए गूंज
बालों के बिज्जू  से टोंस
ताजी हवा तुम जहर है
राक्षस हो जाओ .... राक्षस
के साथ फ्लैट
डेल्टा के आकार का दांत और
जब हंसी
हमारे पर  आंसू

तो आप प्रत्येक दरवाजे के चतुर्भुज चेहरा देखेंगे
कीलाकार लेखन के साथ कि उसके माथे
ताजी हवा तुम जहर है
गर्तिका और देखो में माँ की आँखें
बजाय और
दो सो रही है चमगादड़
भेड़िया आंखें देख चलो
दुनिया के सभी सन्निपात
रियर गिलास चश्मे, उनके मासिक
विद्यार्थियों
दो मुख्य  के
अंधेरा छाया है कि पागल कुत्ते
गया है ध्यान केंद्रित
और आप के लिए टुकड़ा
तेज क्लीवर
ताजा हवा जहर कर सकते हैं

 

पवित्र ट्री


गिर ले लो, अपनी पलकों को जला दिया
क्या यह जमीन सूखी
समय खड़ा है
पीला आकाश
भूत जिंदा दफन लड़की
फिर से पवित्र पेड़ के पैर
मैं चारों ओर आते हैं
रात
गिलास में
लोचदार गले इतना
मोड़ो
सुबह क्योंकि अफ्रीकी मूल निवासी
बे जमीन पर खून था


गिर ले लो, अपनी पलकों को जला दिया

इस कब्रिस्तान के कंधों पर कंकाल
पर स्थानांतरित करने के लिए आओ
और उनकी हड्डी की रैंक
बच्चे बाहर कटौती
गले में बंधी गांठ
को मारने के फटे वाहिकाओं का फव्वारा

गिर ले लो, अपनी पलकों को जला दिया
नंगे पाँव गन की पीढ़ी
कार्टून सपने
 वर्ष निवासियों
सवाल करने के लिए भुगतान उत्पन्न निशान
पोल के मंत्री
अनगिनत लोग हैं, जो नींद है
साइरस की स्मृति में
 नक्शेकदम पर दर्ज किया गया है

 

ध्वनि


सूजन आवाज
आदमी
कि अपने सूचकांक उंगली
 हवा में टूट शाखा
एक खंडहर छिपाने के 1/2
में उल्लू इच्छा घोंसला
आदमी
आदमी
हजार साल पुरानी प्रकाश स्तंभ अंधा
की सड़कों
में
उस्तरा निर्माण समय और गर पोत पर नीचे घाव
बंद पैर
मैलापन में स्थापित
हेलिकॉप्टर के विजेता
और
चूषण मुँह
निरंतर
काटने के लिए
छाया में
किया है
ध्वनि
सूजन आवाज
आदमी
तनाव के विखंडन
फटे मुँह में कब्रिस्तान
डालता है
चीन भूत कौवे
बदबूदार छेद
पुराने का तहखाना
तो  को मार डालो
यह पुनरूत्थान है

 

रक्त महाद्वीप


पृथ्वीके
पुरुषों सैम  अधिक गति का नेतृत्व
पिगलो
जमीन सेनानियों
लेजर हथियार के साथ
मिलेनियम हब की दीवार पर सिर
तीसरी चुप्पी
गरीब महाद्वीप
क्लस्टर बम के लिए उनकी भागीदारी
नोड बदल जाता है
शब्दों नरक डायन नग्न
तारीफ़
रक्त वाहिकाओं में रहने वाले
 बंद कर देता है
भयानक

विनाशकारी कड़वा
छत पर भयानक खंडहर
रासायनिक साथ
और
परमाणु कदम है कि समय निगल
मेरे कंधे पर सूखे
सर्प
पुनर्जन्म, जो बूँदें
गिरता
गटापारचे की गेंद
मई में
एक निर्वात में
शोफ
 - तरह
मोड़
और
रोना
मैं स्वर्गदूतों पाउडर
अब
मैं एक  प्रतिमा किया गया है
हवा काला गरजना है
झटके टन है

 

नहीं

 

 सौर प्रणाली के फर्श पर था युद्ध
 गेंद उपग्रह डेटा के साथ
टैंक
 बच्चों
रोमांचक सर्किट
सूरज
कर रहे हैं बदल गया
जला

फिर भी
गर्म खून
सूअर की खाड़ी के तट पर लाल तूफान
की स्थापना की
था
.....
गोल्ड
पेड़ फेफड़ों का विस्तार
कर रहे हैं डाला
और
महिला जो अपने बच्चे की हड्डी
वहाँ के लिए किया था

 

 

نوشته شده در Sun 6 Apr 2008ساعت 0:33 AM توسط کانون حرفـــــه ای شاعران نوپرداز ایران |

 

شعر گفتار

 

 

اصطلاح شعر گفتار طی چند سال اخیر رواج یافته است اما تاکنون به صورت دقیق تجزیه وتحلیل نگردیده وروشن نشده است که منظور از آن چه می باشد؟ به کدام نوعی از شعر، شعر گفتار اطلاق می گردد؟ ممیزه های شعر گفتار چیست؟ برای تشریح موضوع، لازم است سخن را از تعریف "شعر گفتار" آغاز نماییم.

تعریف:

نخست به این مثال ها توجه کنید:

الف. گل دِسته کده چی خوشنما می آیی

با خنده و ناز و ادا می آیی

نادیده تو را چشم حسد کور شود

ای کبک دری تو از کجا می آیی؟

(ناصر نادر؛ بلگ گنگو، چاپ اول، 1384، ص 122)

ب. هلا، هلا! به کجا می روید برگردید

قدم نهید به میدان اگرنه نامردید

(محمد کاظم کاظمی؛ قصة سنگ و خشت، چاپ دوم، انتشارات کتاب نیستان، تهران، 1382، ص 16 )

ج. هرکس به خیالی خوش، این مؤمن و آن کافر

این معجزه می بیند، آن صحنة یک ساحر

(محمد شریف سعیدی؛ ماه هزار پاره، چاپ اول، انتشارات عرفان، تهران، 1382، ص 87 )

اگر دراین شعر ها دقت نمایید، تفاوت آشکاری را میان آن ها می بینید. شعر نخست با زبان عامیانه ولهجة محلی سروده شده است. شعر دوم لهجة محلی ندارد ولی عناصر زبان گفتار را در خود حفظ کرده است. شاعر به کسی می ماند که در میدان نبرد ایستاده رو به دشمن نموده خطاب می کند که : هلا، هلا به کجا می روید برگردید... شعر سوم با جنبة روایتی بیش تر سروده شده است. شاعر موضوع خاصی را حکایت می کند. شیوة گفتار در آن دیده نمی شود.

پس شعر گفتار آن شعری است که از عناصر زبان عامیانه بهره مند باشد . 

تاریخچه:

در این که شعر گفتار از چه زمانی آغاز گردید، تاریخ موثقی در دست نیست. بعضی گفته اند سابقة شعرگفتار به گات های اوستا بر می گردد، و از آن زمان تاکنون ادامه داشته است. سید علی صالحی طی مصاحبه ای می گوید:

"شعر گفتار یک میراث کهن است که ریشه در گات های اوستا دارد و این لایة بسیار پرظرفیت در خانه شعر فارسی به حیات خود ادمه داده و با حضور در بخش هایی از غزلیات حافظ به اوج خود رسیده است."

(سایت فارسی بی بی سی، 24 مهر 1386 ، مصاحبة رهایگانه با سید علی صالحی)

اما اگر به تعریف شعر گفتار تأمل نماییم به این نتیجه می رسیم که شعر گفتار زمان آغاز، ندارد بلکه توأم با پیدایش شعر، حضور یافته است زیرا "گفتار" نحوة رفتارزبانی است که همراه با احساس شکل می گیرد ؛ از آن جایی که شعر نیز از احساس خالی نمی باشد، طبعاً این رفتار زبانی می تواند در قالب شعر حضور خود را تثبیت نماید. از این رو در آثار هر یک از شاعران قدیم به نوعی از گفتار برمی خوریم. مثلاً در این شعر حافظ می خوانیم:

عیشم مدام است از لعل دلخواه

کارم به کام است الحمد لله

از دست زاهد کردیم توبه

وز فعل عابد استغفر الله

اما آنچه امروز به نام شعر گفتار مطرح است و برخی از آن، به نام "جنبش شعر گفتار" یاد می کنند. در دوران نیما یویشج پدید آمد. نیما با ایجاد تحول در ساختار زبان کلاسیک، نمونه هایی را ارائه داد که در آن ها شعر گفتار به صورت ملموس دیده می شود. بعد از آن شاملو توجه خویش را معطوف داشت و آثار با ارزشی را عرضه نمود و اين امر ادامه يافت تا این که در دهة معاصر می رسیم. در این دهه برخی از شاعران ایرانی مدعی اند که شعر گفتار را ابداع کرده اند چنانچه سید علی صالحی که خود مدعی این امر می باشد در رابطه چنین ابراز نظر می کند:

"بعد از دهه چهل خورشیدی با گرایشی که به زبان آرکائیک و فخیم تحت عنوان شعر سپید وجود داشت و البته ربط چندانی به احمد شاملو نداشت، شعر به یک نوع اشباع شدگی دچار شده بود. همین اشباع شدگی مرا تحریک کرد که در اوایل دهه ۶۰ به نوعی جستجو در شعر دست بزنم و به شعر گفتار برسم."

( همان)

سید علی صالحی تاریخ رویکرد خویش را به دهة شصت می رساند ولی در عین حال اعتراف می کند که :

"این حیات تا زمان نیما هم ادامه داشته و چندین شعر نیما از سال های ۱۳۳۰ تا ۱۳۳۸ به طرز غریبی به شعر گفتار نزدیک است."

(همان)

وی این اعتراف خود را به فروغ نیز تسری می دهد و می گوید:

"فروغ فرخزاد بدون این که این جریان را نامگذاری و تجزیه و تحلیل کند، ناب ترین شعرهای گفتار را سرود."

(همان)

غلام رضا صراف یکی از منتقدان ایرانی در مقالة خود تحت نام "شعر گفتار"، به نقد کتاب "گزاره های منفرد" علی باباچاهی پرداخته وی را مورد نکوهش قرار می دهد که چرا در نوشته هایش از تنردکیا –که مبدع شعر گفتار بود- یادکردی به عمل نمی آورد؟ او می نویسد:

"شاعر و منتقد محترم ، جناب آقای علی باباچاهی در کتاب مفصل و مهمش « گزاره های منفرد»  دو- سه فصل را با عناوین « مقدمه ای بر شعر گفتاری » «گرایش های گفتاری در شعر جوان»  و«شعرگفتاری متعارف و غیرمتعارف » به بررسی مقوله ای به نام شعر گفتار اختصاص می دهد بی آن که نامی از تندر کیا بیاورد که اول بار او بود که گفتار را به صورت مدرن وارد شعر امروز کرد و حتی تا امروز شاعرانی نظیر رضا براهنی و اعضای کارگاهش از تاثیر شعر او برکنار نبوده اند حتی اگر خود به آن واقف نباشند یا اقرار نداشته باشند."

( سایت مانی ها؛ غلام رضا صراف)

«صراف» در این نگاه منتقدانة خویش، به گفته های یدالله رؤیایی استناد می جوید و به نقل از او می نگارد:

"و رؤیایی سی سال بعد نوشت :
"در شعر به خصوص استفاده از زبان مردم کوچه، زبان محاوره ، استفاده از صداها و خطاب ها در شعر مدرن ، عصیان او {تندر کیا} را علیه شعر کهن و شیوه های کلاسیک جسورتر و فراگیرتر از نیما و شاعران هم نسل خود و آن نام ها که بردیم می کند  ."

(همان)

همچنان وی در این مقالة خود از بیژن الهی به عنوان کسی که از تندرکیا تأثیر پذیرفته،  یادآوری می کند و به سخنان خود وی استدلال می نماید.

بدین ترتیب می بینیم که در ایران مدعیان طرح شعر گفتار، کسان زیادی هستند، اما در افغانستان تاکنون نگارنده به مبحث این چنین برنخورده است و کسی را سراغ ندارد که به چند و چون شعر گفتار بپردازد و یا خود نمونه های کامل شعر گفتار را ارائه نماید. لیکن وقتی به مطالعة آثار شاعران  گذشته و حال خود می پردازیم مثال های فراوانی را پیدا می کنیم که به شعر گفتار می مانند؛ مانند شعر های شایق جمال؛ که به لحن محلی سروده شده اند و به شعر گفتار شباهت دارند. این نمونه ها را ببینید:

به باغی ســاز کی سُر باشه خوبس

ز گل هـــــا دامنت پر باشه خوبس

فلـــــک بیــــــجا مریزان آب چشمم

اگــــر در باغ بــــابر باشـــه خوبس

 ***

تا ببزم یار خود را تیلَح هر کس می کند

نوکری والا مـرا تنها چرا پس می کند

گوش کن تا بشـنوی از بزم او پیغام ها

  تیلفون دل بــبین هردم شرنگس می کند

 ***

دلم کی سبـــــــحهء صددانه می شه؟

همیشه ســــاغر و پیـــــمانه می شه!

برآیـــــــــد نور از گبـــــــر و مسلمان

چو یـــار مـــن برون از خــانه می شه

 

خصوصیات و ممیزه های شعر گفتار

چنانچه اشاره شد، شعر گفتار از عناصر زبان عامیانه بهره مند می باشد. باید دید این عناصر كدام هايند؟ در صورتی که برای تمام آن ها جایی درشعر باز نماییم، آیا شعر گفتار تبدیل به شعر عامیانه نخواهد شد؟

آنچه این قلم، آن را به عنوان ممیزه می شناسد، این چندامر است:

1- مخاطب محوری: درشعر گفتار مخاطب در نظرگاه نخست شاعر قرار دارد. شاعر در هر بیت از چشم مخاطب نگاه می کند. لذا برای این که بتواند مطلوبات مخاطب را تأمین نماید، ناچار است قدری با او رابطه برقرار کند. در کنار او بنشیند و سخن دل او را گوش دهد. به این لحاظ زبان گفتار را برمی گزیند  و بر مخاطب نیز مجال می دهد تا در شعرمنزلگاهی داشته باشد.

البته باید این دو نکته را توجه داشت:

اول این که منظور از مخاطب دراین جا، مخاطب عام و مردم کوچه و بازار است؛ زیرا زبان گفتار زبانی است که به عام مردم اختصاص دارد.

دوم این که زبان گفتار تنها به لحن و لهجه اطلاق نمی شود بلکه زبانی را شامل می شود که پتانسیل موجود در زبان عامیانه را در خود داشته باشد.

2-گزاره های انشایی: ما دو نوع گزاره داریم ؛

 یکی گزاره های خبری که از گذشته و حال حکایت می کند و خبر می دهد؛ مانند:

مرغ غریب اشک ز چشمم پریده است

گویا دوباره بوی وطن را شنیده است

(سید ابوطالب مظفری؛ سوگنامة بلخ، چاپ اول، انتشارات حوزة هنری، تهران          1372، ص 29 )

دیگری گزاره های انشایی که به زمان حال برمی گردد و به صورت مستقیم با مخاطب در تماس است؛ مثل:

آی مادر اسپ وزین من کجاست؟

کفش های آهنین من کجاست؟

تیز کن خشم تبرزین مرا

پرکن از آیینه خورجین مرا

(همان؛ ص 39 )

درشعر گفتار سطح درونی زبان با گزاره های انشایی در هم می آمیزد. شعر ممکن است از زبان محاوره و یالحن عامیانه سود نبرده باشد ولی ازخصایص درونی آن بهره مند باشد. چنانچه در شعر دوم می بینید. در عین این که هیچ گونه لهجه و کلمات عامیانه دیده نمی شود اما گزارة انشایی، آن را به شعر گفتار تبدیل کرده است.

3-کیفیت حسی- عاطفی: میزان احساس و عاطفه در شعر گفتار نسبت با سایر سروده ها چند برابر است. چه این که در شعرگفتار فضای غیابی وجود ندارد. هرچیز در فضای حضور وخطاب شکل می گیرد. نحوة عملکرد و رفتار زبانی به نحوی است که هیچ شیء از چشم دید شاعر و خواننده بیرون نمی ماند. هردو در موازی هم آن ها را می بینند، می سازند و در ارتباط به آن ها تماس برقرار می کنند. وشعر، مثلثی می شود از شاعر، مخاطب یا خواننده و اشیا.

4-جسمانیت فضا وخوانش: شعر دو نوع شکل دارد: شکل ظاهری وشکل باطنی. شکل باطنی را فضاهای ناشی از واژه ها وتصاویر تشکیل می دهد و شکل ظاهری آن از بافت کلمات در وزن و قالب های مشخص ساخته می شود. وقتی، حالت غیبت به خطاب تبدیل می شود، جنبة زبانی اثر صورت عینی می یابد. قرائت و خوانش شعر ملموس تر ونمادین تر می گردد. بالتبع آن، فضا نیز جسمانی می شود. رنگ ورخ دیگری به خود می گیرد. لذا هنگامی که می خوانیم:

نقطه، نقطه، نقطه، نقطه، نقطه، نقطه، نقطه، شام

کهشان، ستاره ها واشک های نا تمام...

نامه ی رسیده : نقطه، نقطه، نقطه، نقطه است

نقطه نقطه خون به روی کاغذ سیاه شام

(محمد شریف سعیدی)

دیگر شاعر درمیان واژه هاگم می شود. کلمات، خود حرف می زنند. نقطه ها یکی پی دیگری پایین می ریزند و مفهوم را جسماً به ذهن خواننده انتقال می دهند.

5-صراحت: گویش ها دو صورت دارند:

الف. صریح؛ مثلاً گفته می شود: چنین گفت زرتشت، یک کتاب خوبیه. به خواندنش میرزه.

ب. کنایی؛ مثل: کوه به کوه نمی رسه آدم به آدم می رسه.

در هردو صورت مفهوم روشن است. خواننده در می یابد که مقصود چه می باشد؟ شعر گفتار هم بر صراحت استوار می باشد. بیان به گونه ای انتظام می یابد که هیچ ابهامی در آن دیده نمی شود.

6-شکستن کلمات: شکستن کلمات از خصوصیات زبان محاوره است. این زبان وقتی در شعر راه پیدا می کند، آن خصوصیت را نیز باخود منتقل می كند. چنانچه در این شعر می بینید:

ترسم به باغ پیرهنت آفتی رسد

این ترس هام، کاش مترسک شود پری!

گرچند گرم قصه ای اما چه می شود

از سمت سیب هات شمالک شود پری!

( ژکفر حسینی؛ خوشه( نمونة شعر جوان بلخ)، چاپ اول ،مطبعة مسلکی افغان-کابل،  پاییز 1386، ص6)

7-حرکت: شعر گفتار درحقیقت شعر حرکت است. شعری است که همواره با جنبش و تحرک همراه می باشد. این حرکت ناشی از همان بعد انشایی و حالت گفتاری آن است. وقتی شاعر زبان گفتار را برمی گزیند، ناخود آگاه موجی را وارد جریان شعر می سازد؛ زیرا این موج در ذات گفتار نهفته است و همراه با آن در هر سو کشیده می شود.

8-صدا: هرچند کلمات از صدا ها به وجود می آیند و لی صدایی که در گفتار است با صدای برخواسته از هجا ها متفاوت می باشد.صدایی که در گفتار دیده می شود لحن وریتم خاصی دارد درحالی که صدای زبان نوشتار این گونه نیست. تن صدا در زبان نوشتار آرام و ملایم می باشد.  از این جهت صدا را به عنوان یک خصوصیت جداگانه در شعر گفتار یادآوری کردیم.

9-منطق گفتار: یعنی شعر گفتار از یک ساختار درونیی برخوردار است که آن را از غیر آن باز می شناساند. چنانچه در همان بیت «از سمت سیب هات شمالک شود پری!» می بینید كه جدا از بافت صوری، یک روایت نهفته در درون ما را به خود می خواند و هرخواننده را متوجه خویش می سازد. 

تفاوت شعر گفتار و شعر ساده

با بیان فوق روشن می گردد که شعر گفتار با شعر ساده (یا ساده گویی) از همدیگر تفاوت دارد. هر شعر ساده نمی تواند شعر گفتار به حساب آید چه این که بسیاری از اشعار، ساده و روان سروده می شوند لیکن خصوصیت شعرگفتار را ندارند. منطق گفتار در آن ها حاکم نیست.  به تعبیر منطقی آن، میان شعر گفتار وساده گویی عام وخاص مطلق است.

فایده های شعر گفتار

شعر گفتار دارای محصولات فراوانی می باشد که به چند مورد آن فشرده اشاره می کنیم:

1-هویت تاریخی- فرهنگی: شعر گفتار  زبان ویژه است. هویت مستقل خود را دارد. لذا با همان هویت شناخته شده و جنبة تاریخی پیدا می کند.

2-قوت اثر: شعر گفتار نشانة قدرت اثر است. نشان می دهد که شاعر تسلط کامل بر زبان و وزن شعر دارد.

3-نزدیک شدن به مخاطب: شعر گفتار، شاعر و مخاطب را به هم نزدیک می سازد. رابطة آن دو را تأمین می نماید.

4-تنوع: گفتار یکی از راه های بخشیدن تنوع به شعر است. شاعر با ایجاد فضای گفتاری می تواند شعرش را توان وتنوع ببخشد؛ مثلاً مظفری با استفاده از این نیرو، مثنوی های بلندش را تحرک ورنگ می دهد و از خستگی وملالت خاطر خواننده جلو گیری می کند. این چند بیت مثنوی «شكايتنامه 2» را ببینید:

آی مادر! فکر کوچ و بار باش

مهربان ! امشب کمی بیدار باش

چادر بیچارگی را بخیه زن

چارق آوارگی را بخیه زن

(سید ابوطالب مظفری؛ سوگنامة بلخ، ص 39 )

 

 

 

شعر امروز فارسی پس از پشت سر گذاشتن تحولات چشمگیری در یکی، دو دهه اخیر، به مرحله ای رسیده است که نوعی موقعیت دوسویه برای آن رقم زده شده. برخی هنوز با بی اعتمادی به آن می نگرند و موقعیتی نامطمئن برایش پیش بینی می کنند و برخی نیز بر این باورند که هنوز آن «اتفاق نهایی» در شعر رخ نداده و شعر امروز ما در مرحله آزمون و تجربه است.

فرای این برخوردهای متناقض، جریان اصلی شعر فارسی در بستری مطمئن و با تکیه بر فرهنگ ملی و بومی، روندی روبه رشد داشته است، به گونه ای که امروز حتی می توان نوعی تغییر دوره ادبی نیز در شعر فارسی احساس کرد؛ تغییر دوره ای که برخی آن را «بازگشت ادبی» می نامند، بازگشت به اجرای راهکارها و پیشنهادهای نیما، اما نه در چارچوب اوزان عروضی و یا در قالب شعر نیمایی، بلکه با اجرایی مدرن از آن پیشنهادها و راهکارها.

از آنجا که با هر تغییر دوره ادبی، نوعی جناح بندی ادبی نیز شکل می گیرد، در همین جار و جنجال ها و آشفته بازار جناح های مختلف و مرزبندی های ناشیانه ادبی، جریان اصیل و اصلی شعری کم رنگ جلوه داده می شود و متاسفانه آنچه که باید در معرض دید مخاطب قرار بگیرد، پنهان می ماند. می ماند پیشگویی ها و پیشنهادهای نافرجام!

اگرچه در دهه ۷۰ پیش بینی ها و پیشگویی ها به گونه ای بود که جریان های انحرافی و افراطی را جریان غالب شعر می دانستند اما با گذر زمان هم اینک در اواخر دهه هشتاد به وضوح می بینیم آنان که بی راهه می رفتند، برگشته اند به اصل، وصل شده اند به میانه تا کاملا هدر نروند. این بازگشت ادبی را می توان پایان همه آنچه دانست که پیش تر از آن به عنوان بحران شعر فارسی یاد می شد، بازگشت به بستر شعری مطمئنی که پیش از این نادیده گرفته می شد، بستری مناسب با فرم ذهنی شاعر امروز و تکمیل کننده تحولات بسترهای شعری پیشین.

 

«لیلی لال» دومین مجموعه شعر حسین قنواتی با این پیشانی نوشت آغاز می شود:

«شعرهای این کتاب، تریبون اعتراض انسان هایی است به اشتباهات خرد جمعی و فردی، یعنی به واقعیت. انسان هایی که رنج می برند، پس هستند. اول انسان اند و بعد، آفریده ای زیبا با نام مستعار «زن»...»

اینکه شاعر سعی می کند همان باشد که شعر از او می خواهد، یکی از مهم ترین نکاتی است که می توان با بررسی آن به آسیب شناسی بخشی از شعر امروز پرداخت. برای مثال باید دید حسین قنواتی و شعر در کتاب «لیلی لال» به چنین تفاهمی رسیده اند یا نه!

شعرهای مجموعه «لیلی لال» را می توان از چند زاویه مورد کنکاش قرار داد اما چیزی که در برخورد اول بیش از همه به چشم می آید، لحن و آرایش زبانی قنواتی است.

بی گمان این لحن و این آرایش زبانی، یادآور لحن موسیقایی شعر گفتار است و نوعی تاثیر پذیری از شعر سیدعلی صالحی در آن مشهود است اما شاید اگر به خاستگاه اصلی شعر گفتار برگردیم و معیارهای آن را مرور کنیم، به توجیهی قانع کننده برای شعر قنواتی برسیم.

خاستگاه شعر گفتار برمی گردد به فضای نوستالژیک شعرهای فروغ و مویه هایی که همچون اورادی عاشقانه و غمگنانه در شعر او شنیده می شود. در دهه ۶۰، سیدعلی صالحی با زیرکی این فضای شعری را خارج از وزن شعر نیمایی و با لحنی موسیقایی ادامه داد که در آن از هم آوایی حروف (آلیتراسیون) و سادگی و لطافت زبانی استفاده می کرد. صالحی با اصرار و تکرار این زبان شعری را با عنوان شعر گفتار معرفی کرد. از نسل های بعدی نیز شاعرانی چون؛ سیروس جمالی، فرامرز سدهی و حسین قنواتی تحت تاثیر صالحی به شعر گفتار روی آوردند.

از سیروس جمالی که سال هاست خبری نیست. سدهی نیز رفته رفته شعر خود را از فضای شعری صالحی جدا کرد اما حسین قنواتی پس از مجموعه شعر «خانه ام نزدیک آزادی است» با انتشار مجموعه شعر «لیلی لال» نشان داده است که گویا همچنان به فضای شعر گفتار وفادار مانده است؛ با این تفاوت که این بار سعی کرده است تجربه های تازه تری در فضای شعر گفتار ارائه دهد:

«لباس کهنه ای اگر دارید/ خدا خیرتان بدهد/من قامتم را از چشم بد بپوشانم»

با توجه به نمونه هایی که شاعران شعر گفتار تاکنون ارائه داده اند می توان شعر گفتار را شعری معلق میان آسمان و زمین فرض کرد؛ شعری که مثل دعا و وردی عاشقانه از لبانی اندوهگین گریخته و در فضا سرگردان است. لحن شعر گفتار لحنی زنانه است سرشار از حسی نوستالژیک: «و این منم زنی تنها...»

از همه مهم تر لحن مادرانه شعر سیدعلی صالحی بیشترین تاثیر و نفوذ را میان خوانندگان شعر داشته است.

یکی از شاخصه های شعر قنواتی نیز سادگی و صداقت کلمات است با همان لحن مادرانه در فضای شعر گفتار. انگار تمام شعرهای قنواتی را زنی درمانده و مادری رنجور سروده است:

«پنهان روز و پوشیده در پلاس تاریک شب/در گلوی تو آهی است/که بی نام ترین دختران دریا/جز به خواب های دلخواه من نمی خوانند...»

لیلی در شعر قنواتی موجودی کاملا فراذهنی و تعمیم پذیر است، گاهی زنی بیوه و تنها گاه مادری داغدار.

تمام شعرهای مجموعه «لیلی لال» دارای یک پیشانی نوشت هستند که انگار بیشتر کارکرد معنایی دارند و وظیفه تکمیل فرم محتوایی شعر را به عهده دارند. این پیشانی نوشت ها، همچنین مخاطب را ارجاع می دهند به فضای خارج از متن و به نوعی مرز بین واقعیت و ذهنیت شاعر را برای مخاطب ترسیم می کنند:

«صبح زود یک شب دشوار/خانه ای در ناکجای شهر شلوغ/ زنی بی سرپناه، کنار پنجره ای در طبقه چندم. /(این زن سالی بعد از این شعر خود را فنا کرد)»

این پیشانی نوشت فضای واقعی و ملموس بیرون از متن را به تصویر می کشد و سطر داخل پرانتز نیز ذهنیت مخاطب را برای ارجاعی فرامتنی و فراذهنی در شعر آماده می کند:

طاقتم را به صبح رسانده ام/تنها و ترسیده/بی عاقبت/تا آفتاب آمده بوسه می زند/به ایستگاه هر روز باد/شلوغ و شلخته زیر پایش/شهر شکسته ها/و من که جایی ندارم/در خلوت این خانه چه می کنم/به فریب علاقه ای که هرگز ندیده ام/مانده ام خیره مانند یکی از این همه خسته ها/به جایم نمی آورد زندگی هنوز/روی دست دنیا مانده ام انگار/که آنی چشم ببندم از این بلندی رها کنم خود را/مثل این هزار و یک پرنده بی دلیل/از درد هزار و یک شب بی جهت/که معلومم نمی کند جان به در بیاورم/از خلوت خانه ها.

روایت شعرهای مجموعه «لیلی لال» روایت زنی است تنها و بی عاقبت، زنی که فقط زن نیست بلکه مادر است مادری که مقدس است و شاید به همین خاطر است که قنواتی سعی می کند در خیلی از جاها، لحن شعرهایش را با نوعی باستان گرایی به لحنی آسمانی و دعاگونه نزدیک کند و همچنین با استفاده از امکانات گویش های جنوبی کشور و هم آوایی حروف لحنی آهنگین به شعرش ببخشد:

آه.../لیلی لالی که منم/در این لیالی لا/ها می کنم هی/پلک بلور این شب سرماگرفته را...

شعر «در اقلیم خواب های...» تنها شعری است که در مجموعه «لیلی لال» راوی آن مردی است که روایت زن درونش را بیان می کند. روایت مادری که در پستوی دل هر مردی پنهان است.

راوی در این شعر از پیراهن مادرش روایت می کند و از لابه لای رنگ های پیراهن مادرش به گذشته نقب می زند و فصل های سالیان عمرش را به تصویر می کشد: سفید، سیاه، سبز، زرد، سیاه، سفید.

آه.../ لیلی لالی که منم/در این لیالی لا/ها می کنم هی/پلک بلور این شب سرماگرفته را/تا باز کند به چشم روشنی آغوشش را پنجره/رو به ایستگاه مرداب خواب زده

در صبح زودی که موهایم را می سپارم در پنجه های باد و پیراهن مادرم را می دوزم و...

باز خواب های خوبم ندیده مانده بیدار می شوم/رخت های چرک جهان/چشم به راه من اند.

شاید کاغذ مچاله در خواب های راوی همان شناسنامه زن است و پیراهن مادر تنها ارثیه ای است که برای خواب های ندیده و بی خوابی به «لیلی لال» می رسد تا همیشه هراسان از خواب بیدار شود و ببیند «رخت های چرک جهان» چشم به راه اویند!

نوشته شده در Thu 15 May 2003ساعت 11:36 PM توسط کانون حرفـــــه ای شاعران نوپرداز ایران | |

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